Friday, November 9, 2018

चीन में हो रहा दुनिया का पहला ऐसा प्रयोग

चीन ने गुरुवार को एक वर्चुअल (आभासी) न्यूज रीडर पेश किया। ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टेक्नोलॉजी पर काम करता है। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने इसका करीब दो मिनट का एक वीडियो भी अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया है। दावा है कि ये आर्टिफिशियल न्यूज एंकर वैसे ही खबरें पढ़ेगा जैसे पेशेवर न्यूज रीडर खबरें पढ़ते हैं। इससे प्रोडक्शन की लागत भी कम की जा सकेगी।

इस वर्चुअल एंकर की आवाज, होठों की हरकत और हाव-भाव बिल्कुल असली एंकर की तरह हैं।

24 घंटे लगातार काम कर सकता है : शिन्हुआ के मुताबिक, वर्चुअल न्यूज एंकर उनकी वेबसाइट और सोशल मीडिया चैनल के लिए लगातार 24 घंटे भी काम कर सकता है। इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं होगा। यह समय-समय पर ब्रेकिंग न्यूज पढ़ने के लिए काफी उपयोगी साबित होगा।

इसे बनाने में चीनी सर्च इंजन का भूमिका : इस वर्चुअल एंकर को बनाने में चीनी सर्च इंजन 'सोगो' की अहम भूमिका है। उसने शिन्हुआ के लिए इस तकनीकी का ईजाद किया है। शिन्हुआ के मुताबिक, यह वर्चुअल एंकर न कोई रोबोट है और न ही किसी इंसान का 3डी डिजिटल मॉडल। यह एनिमेशन है जो असली इंसान की तरह नजर आता है।

वर्चुअल एंकर के पहले शब्द- हैलो, आप देख रहे हैं इग्लिश न्यूज प्रोग्राम

इस वर्चुअल न्यूज एंकर का एक वीडियो शिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया है। जिस वीडियो को पोस्ट किया गया है, वह उसका इंग्लिश वर्जन है और इसका दूसरा वर्जन भी चीनी भाषा में पेश किया गया है।
अपने पहले वीडियो में वर्चुअल एंकर कहता है, ‘‘हैलो, आप देख रहे हैं इंग्लिश न्यूज प्रोग्राम। मैं आपको सूचनाएं देने के लिए लगातार काम करूंगा क्योंकि मेरे सामने लगातार टेक्स्ट टाइप होते रहेंगे। मैं आपके सामने सूचनाओं को एक नए ढंग से पेश करूंगा, जिससे आपको नया अनुभव मिलेगा।’’

वू के मुताबिक- आर्टिफिशियल मून से 80 किमी के इलाके में रोशनी हो सकेगी। यह पूछे जाने पर कि योजना कुछ असंभव-सी लगती है, वू ने कहा कि तकनीक पर सालों से काम हो रहा है और अब तो यह प्रोजेक्ट खत्म भी होने वाला है।

लोगों में चिंता
आर्टिफिशियल मून को लेकर लोगों में कुछ चिंताएं भी हैं। उनका कहना है कि रोशनी से जानवरों पर बुरा असर पड़ेगा। साथ ही खगोलीय घटनाओं को देखने में परेशानी होगी। हर्बिन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर कांग वीमिन ने बताया- आर्टिफिशियल मून एकदम चमकदार नहीं होगा। यह धुंधली सी रोशनी देगा।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कोशिशें
यह पहली बार नहीं है कि जब इंसान ने रोशनी देने वाले किसी ऑब्जेक्ट को आकाश में भेजा हो। ऐसी योजनाएं नाकाम साबित हुई हैं। सबसे आखिरी कोशिश रूस ने 2017 में की थी। 

14 जुलाई 2017 को रूस ने कजाकिस्तान के बैकोनुर स्पेसपोर्ट से अंतरिक्ष में सोयूज रॉकेट से एक ऑब्जेक्ट भेजा था। इस ऑब्जेक्ट को चांद के बाद सबसे चमकदार माना गया था। एक महीने बाद ही प्रोजेक्ट से जुड़ी टीम ने बताया कि वह कक्षा में स्थापित होने में विफल रहा।